‘मोंथा’ तूफान को लेकर बड़ा अलर्ट, 21 राज्यों में भारी बारिश | Forecast Alert Today

By Shreya

Published On:

Join WhatsApp
Join Now

Forecast Alert Today – भारत में फरवरी का महीना आमतौर पर ठंड और गर्मी के बीच की एक सुहानी कड़ी माना जाता है, लेकिन इस बार स्थिति कुछ अलग नजर आ रही है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि फरवरी के आखिरी दिनों में आसमान फिर से मेहरबान नहीं, बल्कि रौद्र रूप धारण कर सकता है। चक्रवाती गतिविधियों और पश्चिम से आने वाले तूफानी मोर्चे के मिलने से देश के कई हिस्सों में मौसम खतरनाक करवट ले सकता है। यह चेतावनी केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि जनजीवन, खेती और परिवहन को सीधे प्रभावित करने वाली एक ठोस वास्तविकता है।


मौसम विभाग का क्या कहना है?

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने अपने ताजा पूर्वानुमान में बताया है कि 25 फरवरी से 29 फरवरी 2026 के बीच देश के उत्तरी और मध्य हिस्सों में मौसम बेहद अनिश्चित रह सकता है। चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ की सक्रियता और एक नए पश्चिमी विक्षोभ के एक साथ आगे बढ़ने से वायुमंडलीय दबाव में तेज बदलाव होगा। इस संयुक्त प्रभाव के चलते तेज हवाओं, आकाशीय बिजली, भारी बारिश और ओलावृष्टि जैसी प्रतिकूल मौसमी घटनाओं की आशंका बन रही है। मौसम विभाग ने आम जनता से अनुरोध किया है कि वे इन दिनों में अनावश्यक जोखिम से बचें और अधिकारिक सूचनाओं पर निगाह रखें।


उत्तर भारत पर सबसे ज्यादा असर

उत्तर भारत के राज्यों पर इस मौसमी उथल-पुथल का सबसे गहरा असर पड़ने का अनुमान है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और बिहार जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में गरज के साथ तेज बारिश और ओले गिरने की प्रबल संभावना जताई गई है। इन इलाकों में रहने वाले करोड़ों लोगों की दिनचर्या, आवाजाही और व्यवसाय इस मौसमी बदलाव से सीधे प्रभावित हो सकते हैं। राज्य सरकारों को भी सतर्क किया गया है कि वे आपदा प्रबंधन तंत्र को पहले से तैयार रखें।

यह भी पढ़े:
अब सीनियर सिटीजन की जिंदगी होगी और आसान, सरकार की 8 नई सुविधाओं का मिलेगा सीधा लाभ Senior Citizen

पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी का खतरा

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों में यह मौसमी बदलाव और भी कठिन रूप ले सकता है। ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी के कारण प्रमुख सड़क मार्ग और पहाड़ी दर्रे बंद हो सकते हैं, जिससे हजारों लोग फंस सकते हैं। भूस्खलन और हिमस्खलन की आशंका भी बनी हुई है, जो इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। प्रशासन ने पहले ही स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को सतर्क करते हुए यात्रा टालने की अपील की है।


किसानों के लिए चिंता का समय

फरवरी के अंतिम सप्ताह में रबी फसलों की स्थिति बेहद नाजुक होती है और इस बार मौसम ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। गेहूं, सरसों और चने की फसलें इस समय पकाव की अवस्था में होती हैं और किसी भी प्रकार की ओलावृष्टि या तेज हवा इन्हें बर्बाद कर सकती है। फसल के दाने भीगने से उनकी गुणवत्ता घट जाती है, जिसका सीधा असर बाजार में मिलने वाले मूल्य पर पड़ता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे इन दिनों सिंचाई और कीटनाशक छिड़काव बंद रखें तथा कटी हुई फसल को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएं।


तापमान में गिरावट का असर

मौसम के बिगड़ने के साथ-साथ तापमान में भी तेज गिरावट का अनुमान लगाया गया है, जो आमजन को एक बार फिर कड़ाके की ठंड का एहसास करा सकता है। मैदानी इलाकों में न्यूनतम तापमान तीन से पांच डिग्री सेल्सियस तक नीचे खिसकने की आशंका है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में पारा शून्य से भी नीचे जा सकता है। सुबह और रात के वक्त ठंड विशेष रूप से चुभने वाली होगी, इसलिए बुजुर्गों और बच्चों का खास ख्याल रखना जरूरी होगा। मौसमी बीमारियों जैसे सर्दी, खांसी और बुखार से बचाव के लिए पहले से सावधानी बरतना समझदारी है।

यह भी पढ़े:
बजट में धमाका! OnePlus का किफायती 5G स्मार्टफोन हुआ लॉन्च, 108MP कैमरा, 12GB रैम के साथ मिलेगा 80W का फास्ट चार्जर

तेज हवाओं से नुकसान की आशंका

चक्रवाती प्रणाली के प्रभाव में जो हवाएं चलेंगी, वे सामान्य से कई गुना तेज होंगी और इनसे जानमाल को नुकसान का खतरा है। तेज हवाओं से पेड़ उखड़ने, बिजली के खंभे गिरने और कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं हो सकती हैं। इन हालात में बिजली आपूर्ति बाधित होना और सड़क व रेल यातायात रुकना भी लाजमी होगा। नागरिकों को सलाह दी गई है कि तूफानी हवाओं के दौरान खुले मैदानों, टूटे-फूटे ढांचों और बड़े पेड़ों के पास जाने से परहेज करें।


शहरी नागरिकों के लिए सावधानी जरूरी

शहरों में रहने वाले लोग अक्सर मौसम की चेतावनियों को हल्के में ले लेते हैं, लेकिन इस बार ऐसा करना भारी पड़ सकता है। घर की छत, बालकनी या बाहर रखी हुई ढीली वस्तुएं तेज हवाओं में उड़कर दुर्घटना का कारण बन सकती हैं, इसलिए उन्हें पहले ही सुरक्षित कर लेना चाहिए। जलभराव वाले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है और ऐसे रास्तों से वाहन चलाना जानलेवा हो सकता है। आकाशीय बिजली चमकने के दौरान किसी सुरक्षित इमारत के अंदर रहना और खुले मैदानों से दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है।


यात्रियों को मिली खास हिदायत

मौसम विभाग ने उन सभी लोगों को विशेष आगाह किया है जो फरवरी के आखिरी सप्ताह में कहीं जाने की योजना बना रहे हैं। पहाड़ी इलाकों की यात्रा इन दिनों जोखिम भरी हो सकती है, क्योंकि बर्फबारी और सड़क बंद होने से यात्री फंस सकते हैं। वाहन चालकों को धीमी गति से गाड़ी चलाने, फिसलन भरी सड़कों पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने और धुंध में हेडलाइट चालू रखने की सलाह दी गई है। किसी भी यात्रा पर निकलने से पहले स्थानीय मौसम रिपोर्ट और प्रशासनिक निर्देशों की जानकारी अवश्य लें।

यह भी पढ़े:
Samsung का जबरदस्त परफॉर्मेंस और प्रीमियम लुक वाला 5G फ़ोन हुआ लॉन्च, 12GB रैम के साथ मिलेगा 64MP का OIS कैमरा

डिजिटल माध्यम से रहें अपडेट

आज के डिजिटल युग में मौसम की जानकारी पाना बेहद आसान है और हर नागरिक को इसका फायदा उठाना चाहिए। मौसम विभाग की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल एप्लिकेशन और सरकारी अलर्ट सेवाएं सटीक और समय पर जानकारी देती हैं। स्मार्टफोन में वेदर ऐप इंस्टॉल करना और उसकी सूचनाएं चालू रखना एक छोटी सी आदत है, जो किसी बड़े संकट से बचा सकती है। समाचार चैनल और विश्वसनीय समाचार पोर्टल भी नियमित मौसम अपडेट का अच्छा स्रोत हैं।


सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा

प्रकृति के सामने इंसान की शक्ति सीमित होती है, लेकिन समय पर सतर्कता और सही जानकारी से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ‘मोंथा’ तूफान और पश्चिमी विक्षोभ के संयुक्त प्रहार से उपजी यह मौसमी चुनौती एक याद दिलाती है कि प्रकृति के संकेतों को नजरअंदाज करना महंगा पड़ता है। किसान हो या शहरी, यात्री हो या घर पर बैठा बुजुर्ग, सभी के लिए यही संदेश है कि इन दिनों सावधानी को प्राथमिकता दें। सही तैयारी, जागरूकता और प्रशासनिक दिशानिर्देशों का पालन ही इस मौसमी आपदा से बचाव का सबसे मजबूत हथियार है।

यह भी पढ़े:
गरीबों के लिए खुशखबरी सिर्फ 3999 में लांच हुआ 200 MP कैमरा वाला | Jio Phone5g

Leave a Comment